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ॐ नमो आदेश गुरुजी को आदेश माता भभूत पिता भभूत त्रिलोक तारिणी या भभूत किसने हाणी किसने छानी महादेव ने हाणी पार्वती ने छाणी !! स्यानौनाथ चौरासी सिद्धो की भभूत इस पिण्ड के मस्तिषक चढानी चढे भभूत धर्ती पडे धाऊ रक्षा करे गुरु गोरख राऊ !! भाग भाग रे शाकनि डाकनि मडी मसाणी दैत्य दानव राग – दाग शक्ति पाताल मीन मेखला को पुत्र उत्र हाको तेरो प्राण मै गाडो पांडवी बाण सरसों चेडा मैने साधी लंका जाये रावण बांधों कौउनिकी जिउदाल काल की पाती जाग जाग रे भैरों तीन त्रिलोकी नाथ हांकती डैणी वज्र मारो फांकती डैणी वज्र मारो अंम्बादी जंम्बादी डैणी वज्र मारो जल भूत को मारो थल भूत को मारो !

ॐ नमो आदेश गुरुजी को आदेश माता भभूत पिता भभूत त्रिलोक तारिणी या भभूत किसने हाणी किसने छानी महादेव ने हाणी पार्वती ने छाणी !! स्यानौनाथ चौरासी सिद्धो की भभूत इस पिण्ड के मस्तिषक चढानी चढे भभूत धर्ती पडे धाऊ रक्षा करे गुरु गोरख राऊ !! भाग भाग रे शाकनि डाकनि मडी मसाणी दैत्य दानव राग – दाग शक्ति पाताल मीन मेखला को पुत्र उत्र हाको तेरो प्राण मै गाडो पांडवी बाण सरसों चेडा मैने साधी लंका जाये रावण बांधों कौउनिकी जिउदाल काल की पाती जाग जाग रे भैरों तीन त्रिलोकी नाथ हांकती डैणी वज्र मारो फांकती डैणी वज्र मारो अंम्बादी जंम्बादी डैणी वज्र मारो जल भूत को मारो थल भूत को मारो !!

 निंद्रा स्तभन तंत्र

वृहती वृक्ष की जड मधु (शहद) के साथ घिसकर उसका नस्य लेने से निंद्र स्तभन होती है !!

 अथ विद्वेषण मंत्र

ॐ नमो भगवती शमशान कालिके अमुकाऽमुकेन सह विद्वेषय विद्वेषय हन हन पच पच मथ मथ हुं फट् स्वाहा !!

विधि – इस मंत्र से कडवे तेल में नीम, तिल, चावल मिलाकर खैर की लकडी को शमशान की अग्नि से जलाकर दस हजार आहुति देने से दोनों मे वैर भाव हो जाता है !!

 अथ स्त्री वशीकरण मंत्र

ॐ आं ऐं भग भुगे भगोदरि भगमाले भगावहे भगगुह्ये भगयोने भगनिपातिनि सर्व भगवशंकरि भगरुपे नित्यक्लिन्ने भगस्वरुपे सर्व भगानि मह्यानय वरदे रेते सुरेते भगक्लिन्ने क्लिन्नद्रवे क्लेदय द्रावय अमोघे भगविच्चे क्षोभय क्षोभय सर्वसत्वान् भगेश्वरि ऐं ब्लूं जं ब्लूं में ब्लूं मौं ब्लूं हें ब्लूं हें क्लिन्ने सर्वाणि भगानि मे वशमानय स्त्रींहरल्बें ह्रीं भगमालिनि स्वाहा !!

विधि - इस मंत्र का १०८ प्रतिदिन जप करने से स्त्री वशीकरण होता है !!

 अथ शैतान स्त्री वशीकरण मंत्र

बड पीपल थान जहां बैठा अजाजील शैतान मेरी सबीह मेरीसी सूरत बन अमुकी (नाम) को जारा ना रानै तो अपनी बहन भानजी के सिर जान पग चलता अमीरान् जो न रानै तो धोबी की नाद चमार की खाल कलाल की माठी पड जो राजा चाहे राजा को मै चाहूं अपने काज को मेरा काम न होगा तो आनसीमें तेरा दामनगीर रहूंगा !!

विधि – शनिवार से १२ (बारह) दिन तक अर्द्धरात्रि के समय नंगा हो १२ (बारह) राई को हाथ में ले कर प्रत्येक राई के उपर १२ (बारह) मंत्र पढकर अग्नि में डालें स्त्री साधक के प्रेम में वशीभूत हो हाजिर हो जायेगी !!

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