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गुरु सत्यं विस्मिल्लाहका पूज्योमा आवनकार आदि गुरु सृष्टि करतार वेद वहर तारांहि एकी आइ युग चारि तीन लोक वेद चार पांचो पांडव छै मारग सात समुद्र आठ वसु नव ग्रह दश रावण ग्यारह रुद्र बारह राशि तेरह मोल चौदह शोक पंद्रह तिथि चार खानि चार वानी पांच भूत चौरासी आत्मा लाषति अयानि अष्ट कुली नाग तैतीस कोटि देवता आकाश पाताल मृत्यु लोक रात दिन पहर घडी दण्ड पल विपल महारथ साषिधर मेहौ अब जो कछु फलाने को पीडा देव दानव भूत प्रेत राखी सुजानु विनानु किताकराषादितावा क्षा गाठि मुठी रषणी मुखणी विलनी फोठौरीगद्वही नीनाई क षोलाइ अधौगी कर्ण शूल वायु शूलुण सुरुनन हरु वागडहरु वाजगरहूक रक्त पीत मूत्र कुक्ष डढारह प्रमेह गोला पलीहान हरुआ अहोगासोगा अर्ध शीशी कुटीलुती बुवारी र्मिगी कमल वांड हंडी आनुवावुहये लगंडक्रवायु चोट फेट दिताकिताला पालगाया षरपितीलंघाउ लंघा बाट घाट बाहर निसार पसार सांझ सकार कई प्रकार होइ हाडऊ दवार चाम नाडी अर्द्ध अंग जहारुसी दुहाई सलेमान पैगम्बर की तुरन्त विलाही षीनजाही नातरु सवा लाख पैगंम्बर की बज्र की थाप नवनाथ चौरासी सिद्धौ का श्राप शेष सरपूदी अहिआपीर मनेरी की शक्ति बाबा आदम की भक्ति जरि भस्म होई जाय जाहि निहिनिषद्ध जाहि पिंड कुशल दोष फट् फट् स्वाहा !!

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